गुरमेहर कौर: ‘अभिव्यक्ति’ पर भक्तों के शिकंजा कसने और हम इज्ज़तदारों के खामोश रहने की संस्कृति
"पहले वो दामिनी के लिये आये मैं चुप रहा क्योंकि मैं रेप पीड़िता नहीं था फिर वो अख़लाक के लिये आये मैं चुप रहा क्योंकि मैं मुसलमान नहीं था फिर वो रोहित के लिये आये तब भी मैं चुप था क्योंकि मैं दलित नहीं था फिर वो कन्हैया के लिये आये तब भी मैं चुप रह क्योंकि मैं वामपंथी नहीं था फिर वो गुरमेहर के लिये आये तब भी मैं चुप रहा क्योंकि मैं लड़की न था फिर वो मेरे लिये आये लेकिन तब तक मेरे लिये बोलने वाला कोई बचा ही नहीं था।।" जी हाँ, आज यही हो रहा है हमारे देश में, गौमांस के नाम पर हत्यायें हो रही हैं, प्रमोशन के लिये "फेक एन्काउंटर" किये जा रहे हैं, नज़ीब गायब है और उस पर सवाल उठाने वालों को "देशद्रोही" ठहराकर उनको सरेआम मारापीटा जाता है और अगर सवाल करने वाली कोई लड़की हुई तो उसे रण्डी(बरखा दत्त प्रकरण) और न जाने क्या-क्या कहकर उसका रेप करने की धमकी दी जा रही है। और इसी कड़ी में देशभक्त-रूपी भेड़ियों नें गुरमेहर कौर को अपना शिकार बनाया है। जी हाँ, ये वहीं गुरमेहर DU की स्टूडेंट हैं जिन्होंने ABVP के गुण्डों की गुण्डागर्दी का विरोध करते हुये फेसबुक...